गुरुवार, 18 नवंबर 2021

केश सज्जा

द्वारा : अशर्फी  लाल मिश्र 


बिखरे बाल बरबादी , बंधे बाल खुशाल। 

कटे बाल सम भाव के ,ऐसा केशन हाल।।


कवि : अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर। 

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