द्वारा : अशर्फी लाल मिश्र
बिखरे बाल बरबादी , बंधे बाल खुशाल।
कटे बाल सम भाव के ,ऐसा केशन हाल।।
कवि : अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर।
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र (1943----) बगिया में इक फूल गुलाब, देख माली कर रहा आदाब। भौरे करते उसका यशगा...
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