शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2021

नीति के दोहे मुक्तक

कवि : अशर्फी लाल मिश्र  

अशर्फी लाल मिश्र





करक चतुर्थी 

नारी व्रतों में उत्तम ,करक चतुर्थी जान। 

चिर सुहागिन संदेशा ,इसकी मंशा मान।।


कवि : अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर। 

शनिवार, 16 अक्टूबर 2021

नीति के दोहे मुक्तक

 कवि : अशर्फी लाल मिश्र 

अशर्फी लाल मिश्र 

केश 
श्वेत   केश  तजुर्बे   के, काले  केश उमंग। 
काजल रेख नयन संग , मन में भरता रंग।।

 पाषाण हृदय

पाहन  हिय मृदुता  संग ,सरल ह्रदय बन  जाय। 
जिमि शैल खंड जल धार, रुचिर शिवांग कहाय।।

कवि : अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर , कानपुर।  




गुरुवार, 7 अक्टूबर 2021

नीति के दोहे मुक्तक

 द्वारा :  अशर्फी लाल मिश्र 




अरे  माटी पुतले तू ,बन जाये  इंसान।
चंद कागज के टुकड़े , पर खोता ईमान।।

©कवि : अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर,कानपुर।  



 



  



 



फूल गुलाब का

  लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र (1943----) बगिया में इक फूल  गुलाब, देख माली कर रहा आदाब। भौरे  करते उसका  यशगा...