बुधवार, 27 नवंबर 2019

सत्ता (मुक्तक)

Asharfi Lal Mishra  










© कवि :अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर , कानपुर

कभी सत्ता मिलती आसानी से,
कभी  सत्ता   छीनी   जाती   है।   

राजतन्त्र     में   खून    खराबा ,
जनतंत्र   में  आंकड़े   बाजी  है। 

सत्ता  का  लोभ  सदा  सर्वोपरि ,
धुर विरोधी गले से मिलते दिखे। 

आजादी का ढिंढोरा पीटने वाले ,
सत्ता के लिए बंधक होते दिखे। 

न   कोई       सेक्युलर   न   कोई    वादी ,
सभी सत्ता के लिए गले से मिलते दिखे।

  

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