शनिवार, 27 जनवरी 2024

विप्र सुदामा - 36

 कवि एवं लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर.

अशर्फी लाल मिश्र (1943---=-)







सपने में देखा मुरलीधर को, 

क्या कुछ  माँगा उनसे प्रिये

हम सदा तत्व ज्ञानी ब्राह्मण,

कभी लालच  नाहीं मेरे हिये।।


नाथ  मुरली  ध्वनि अति मधुर,

हम तनमय  होकर सुनती रही।

अचानक मुरली ध्वनि बन्द हुई,

अरु आँखे खुली, खुली ही रही।।


नाथ जब देखा आँखे मलकर,

झोपड़ी जगह  बना था  महल

नाथ तभी  आ गई  एक दासी,

उसने  कहा  क्या  करूँ टहल।। 


हर  कोई  अचम्भा  कर रहा,

अति भीड़ जुटी बाहर महल

विप्र  छानी  जगह रातों रात,

कैसे  बना  यह  भव्य  महल।।


नाथ मुरलीधर  की रही कृपा,

जो रातों रात  बन गया महल।

नाथ हमने कुछ भी माँगा नहीं,

अब  तो  पधारो  अपने महल।।

कवि एवं लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©


सोमवार, 1 जनवरी 2024

बाइस जनवरी सन चौबीस

 -- लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943-----)







बाइस जनवरी सन चौबीस, 

मन रही दीवाली घर घर में।

सदियों से है रिक्त सिंहासन,

चर्चा हो  रही है  जन जन में।।


सिंहासन रिक्त साकेतपुरी,

मनु  राम अभी  थे  बन में।

राम होंगे आरूड़ सिंहासन,

चर्चा  हो रही  जन  जन में।


चारों ओर  ख़ुशी  है  फैली,

बज रही बधाई  घर  घर में।

राम  होंगे आरूड़ सिंहासन,

चर्चा  हो  रही जन  जन में।।


भक्त विश्व के कोने कोने से,  

पहुँच रहे  हैं साकेत धाम में

राम  होंगे आरूड़ सिंहासन,

चर्चा  हो  रही  जन  जन  में।।


जन जन की  एक  ही इच्छा,

उत्सव देखूंँ साकेत  धाम  में।

राम  होंगे  आरूड़  सिंहासन,

चर्चा  हो   रही   जन  जन  में।।

कवि एवं लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

दहशत में मानवता

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