शनिवार, 18 दिसंबर 2021

नीति के दोहे मुक्तक

 द्वारा: अशर्फी लाल मिश्र

अशर्फी लाल मिश्र






                दोहा

माता होय प्रथम गुरू, दूजा गुरु पितु मान।

औपचारिक देय ज्ञान,अन्य  गुरु उसे जान।।


कवि: अशर्फी लाल मिश्र,अकबरपुर, कानपुर।



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

भार्गव राम खण्डकाव्य - 26

  लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र (1943---) कुटिया की दुर्गति देखि, अरु मातु पिता अपमान। मातु सम  दिव्य कामधेनु, ...