रविवार, 22 सितंबर 2019

वर्षा गीत (मुक्तक)

© अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर ।                                                               
                                                                
बरस   रहे   बदरा   बरस  रहे बदरा
बरस  रहे   बदरा  ओ  मोरी गुइयाँ।।

उमड़   रहे   बदरा  घुमड़ रहे बदरा
बरस  रहे  बदरा  ओ  मोरी  गुइयाँ।।

गरज   रहे       बदरा  , बरस    रहे   बदरा।
दमकि रही दामिनि,डरपि रह्यो जियरा।

नाच    रहे    केकी  , गाय    रहे    भेकी।
झूम   रहे     पादप , ओ   मोरी   गुइयाँ।। बरस रहे --

ताल    तलइयान  में  छायो  है यौवन।
इठलाइ रहीं  नदियाँ ओ  मोरी गुइयाँ।

`जिन  सखियन  के  घर  में हैं साजन।
झूम  रही  सखियाँ  ओ  मोरी    गुइयाँ।। बरस रहे ---

हमरे  साजन  विदेसवा   में  छाये।
सूख रहा  तनवा ओ मोरी  गुइयाँ।

बरस  रहे   बदरा   गरज रहे बदरा।
ओ       मोरी          गुइयाँ---।।

--अशर्फी लाल मिश्र 

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