सोमवार, 25 नवंबर 2024
दोहे प्रदूषण पर
शुक्रवार, 15 नवंबर 2024
विप्र सुदामा - 53
लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
| अशर्फी लाल मिश्र (1943-----) |
यद्यपि कान्हा राजा द्वारिका,
तदपि मन था शांत नहीं।
धन वैभव की तीव्र लालसा,
मन में थी सुख शान्ति नहीं।।
राज्य रक्षा प्रजा पालन,
इसी में समय गुजरता था।
शैय्या पर जब होयें कान्हा,
तब तब याद आयें सुदामा।।
छप्पन भोग संध्या थाली,
रुक्मिणी संग आईं भामा।
प्रिये मँगाओ रथ हमारा,
हम जाना चाहें पुरी सुदामा।।
रात अँधेरी अकेले जाना,
राजन देता शोभा नहीं।
साथ सारथी सुरक्षा सैनिक,
नाथ अकेले जाना ठीक नहीं।.
प्रिये! हम हैँ कुशल सारथी,
इसमें है कोई शंका नहीँ।।
सदा साथ रहे सुदर्शन चक्र,
निज रक्षा में भी शंका नहीं।।
रचनाकार एवं लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©
बुधवार, 13 नवंबर 2024
बिनु पानी बेहाल
| अशर्फी लाल मिश्र (1943-----) |
सोमवार, 11 नवंबर 2024
विप्र सुदामा - 52
लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर कानपुर।
| अशर्फी लाल मिश्र (1943-------) |
एक दिवस कान्हा शैय्या पर,
इसी मध्य आ गई थी भामा।
प्रिये लागा मन मेरा मीत में,
मन कहता रहूँ पुरी सुदामा।।
नाथ मत सोचो तुम ऐसा,
द्वारिका हो जायेगी अनाथ।
आगे आगे होंगे नाथ द्वारिका,
पीछे होगी द्वारिका साथ साथ।।
राजा का धर्म प्रजा पालन,
पलायन करना धर्म नहीं।
सदा मीत तुम्हारे धर्म धुरी,
पथ से होते विचलित नहीं।।
प्रिये राजधर्म है वैभव युक्त,
हमारी उसमें आसक्ति अभी।
अब मेरे मन में उठ रहे भाव,
सब वैभव त्यागूँ आज सभी।।
मीत हमारा रहता छानी,
फिर भी रहता मगन सदा।
हम हैँ प्रिये द्वारिका राजा,
फिर भी रहते चिंतित सदा।।
लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©
दहशत में मानवता
लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।© अशर्फी लाल मिश्र (1943-------) मानवता आज दहशत में, चहुँ ओर मचा हाहाकार। दानवता अब...
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© लेखक : अशर्फी लाल मिश्र Asharfi Lal Mishra वियोगी होगा पहला कवि...