मंगलवार, 27 अप्रैल 2021

आज हर कोई दिखता बेदम नजर(गजल)

 द्वारा:अशर्फी लाल मिश्र

अशर्फी लाल मिश्र 







कोरोना   की  आई   दूसरी   लहर,

आज हर कोई दिखता बेदम नजर।


जिधर भी नजर डाल कर देखता हूँ,

उधर   निराशा निराशा आती नजर।


कहीं   लाल   पड़ा   चिर  निद्रा  में,

कहीं    माता    असीम   पथ   पर।


आज    प्यार    बन्धन    टूट    रहे,

हर    कोई    हाथ   हिलाता नजर।


कोरोना    की   आई  दूसरी  लहर,

आज हर कोई दिखता बेदम नजर।

© अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर,कानपुर देहात।

रविवार, 25 अप्रैल 2021

एक तरफ जनतंत्र की शहनाई

 द्वारा: अशर्फी लाल मिश्र







एक तरफ जनतंत्र की शहनाई,

दूसरी तरफ कोरोना का कहर।

एक तरफ   जनतंत्र  का नशा,

दूसरी तरफ  प्राणों की  बाजी।।


आज तंत्र के सम्मुख,

हुआ    जन   बौना।

कैसा       जनतंत्र ?

कैसा जन महोत्सव ?


कितनी मातायें  बिना लाल के,

कितने लाल  बिना माताओं के।

कैसी   विडंबना   है   दैव   की,

फिर भी  गूंजे  शहनाई कानों में ।।


आज   जन   हारा   है,

तंत्र  ने  बाजी  मारी है।

प्राणों    के     भय   से,

'लाल' घर में दुबक रहा।।


कवि: अशर्फी लाल मिश्र,अकबरपुर,कानपुर।



फूल गुलाब का

  लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र (1943----) बगिया में इक फूल  गुलाब, देख माली कर रहा आदाब। भौरे  करते उसका  यशगा...