बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

प्रातः मेरी खिड़की पर

 लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943-----)






प्रातः मेरी  खिड़की पर,

दस्तक  देती  है  गौरैया।

जब तक बिस्तर न छोड़ूँ,

टिक टिक करती गौरैया।।


निस्वार्थ उसकी सेवा से,

गद गद  रहता  मेरा मन।

कभी नहीं बदले में माँगा,

फिर भी रहता तत्पर मन।।


मनु  है कोई  गृह सेवक, 

कर्तव्य  कर रही गौरैया।

मेरे घर  के आँगन में ही,

दाल भात खाती गौरैया।।


बचपन से यारी मेरी,

आँगन फुदके गौरैया।

फुदक नृत्य करती थी,

मेरा  मन  मोहे गौरैया।।


मनु बचपन की यारी का,

कर्तव्य निभा रही गौरैया।

जब जब खिड़की खोलूँ,

 तुरत  उड़  जाये  गौरैया।।

रचनाकार एवं लेखक: अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

प्रातः मेरी खिड़की पर

  लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र (1943-----) प्रातः मेरी  खिड़की पर, दस्तक  देती  है  गौरैया। जब तक ब...