बुधवार, 11 फ़रवरी 2026

झलक उपवन की

 लेखक एवं रचनाकार - अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

(अशर्फी लाल मिश्र 1943-----)


दिनकर ने  आँखें खोली,

तब कलियाँ थीं अलसाई।

पात पात पर बिखरे मोती,

रहा  बटोर  दिनकर  मोती।।


अब  खुल  रही थी आँखें,

एक  एक   कलियन की।

मधुकर  कर रहे थे गुंजन ,

मनु   घेरे  थे रसिक  जन।।


कुछ  मकरंद में मदहोश,

कुछ कर  रहे  थे  गुंजन।

कुछ आ   रहे   थे  अभी,

चाहत सुगंध मकरन्द की।।


तितलियाँ थीं मन मोहक,

थीं निज सतरंगी वसन में।

दौड़  दौड़  कर रहीं नर्तन,

मनु  मोह   रहीं  बागन  में।।


इसी बीच आ धमका माली,

लिये डलिया  निज हाथ में।।

जो खिलखिला रहीं कलियाँ,

चुन चुन रख लिये डलिया में।।

लेखक एवं रचनाकार: अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

शनिवार, 7 फ़रवरी 2026

दशमी का चाँद

 लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943------)






दशमी   का   चाँद    ऐसा,

मनु नवल बधु का मुखड़ा।

कुछ      काल         ठहरो,

मत कहो किसी से दुखड़ा।।


संयम    राखो    मन     में,

उठ जायेगा परदा धीरे धीरे।

शम्मुख  होगी  शरद    पूनो,

होगी    चाल     धीरे     धीरे।।


मुस्कान      होगी     ऐसी।

जनु अमृत वरसे धीरे धीरे।।

— लेखक एवं रचनाकर: अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

प्रातः मेरी खिड़की पर

 लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943-----)






प्रातः मेरी  खिड़की पर,

दस्तक  देती  है  गौरैया।

जब तक बिस्तर न छोड़ूँ,

टिक टिक करती गौरैया।।


निस्वार्थ उसकी सेवा से,

गद गद  रहता  मेरा मन।

कभी नहीं बदले में माँगा,

फिर भी रहता तत्पर मन।।


मनु  है कोई  गृह सेवक, 

कर्तव्य  कर रही गौरैया।

मेरे घर  के आँगन में ही,

दाल भात खाती गौरैया।।


बचपन से यारी मेरी,

आँगन फुदके गौरैया।

फुदक नृत्य करती थी,

मेरा  मन  मोहे गौरैया।।


मनु बचपन की यारी का,

कर्तव्य निभा रही गौरैया।

जब जब खिड़की खोलूँ,

 तुरत  उड़  जाये  गौरैया।।

रचनाकार एवं लेखक: अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

पतलइयाँ गोरी गोरी

 रचनाकार एवं लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र (1943----) मधुमास  महीना जब  जब , चमकें पतलइयाँ गोरी गोरी। मन हर किस...